मल्टीप्लेक्स का लोकतांत्रीकरण करना होगा, कीमतें घटानी होंगी : उत्पल आचार्य

नई दिल्ली। मीडियाप्रन्योर और कंटेंट इंजीनियर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओओ) उत्पल आचार्य का कहना है कि सिनेमा के प्रति दर्शकों के बदलते रुझान और ओटीटी युग की चुनौतियों के बीच मल्टीप्लेक्स मॉडल को नए सिरे से सोचने की ज़रूरत है। मल्टीप्लेक्स का लोकतांत्रीकरण करना पड़ेगा और कीमतें घटानी पड़ेंगी।

आचार्य न्यू दिल्ली फिल्म फाउंडेशन (एनडीएफएफ) द्वारा रविवार को श्री अरबिंदो सेंटर फॉर आर्ट्स एंड क्रिएटिविटी में आयोजित मासिक संवाद श्रृंखला “टॉक सिनेमा ऑन द फ्लोर” के फरवरी चैप्टर में मुंबई से ऑनलाइन विशेष अतिथि के रूप में बात कर रहे थे।

आचार्य ने अपने दो दशक से अधिक के अनुभव के आधार पर फिल्म इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली, डिस्ट्रीब्यूशन, निवेश और ओटीटी युग में आए बदलावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सिंगल स्क्रीन से मल्टीप्लेक्स तक के बदलाव और अब उभरते “मिनिप्लेक्स मॉडल” पर भी बात की। उनके अनुसार आने वाले समय में 100-200 सीटों वाले थिएटर का दौर हो सकता है, जहाँ टिकट कीमत लगभग 100 रुपये के आसपास रखी जानी चाहिए, ताकि आम दर्शक फिर से सिनेमाघरों की ओर आकर्षित हो। उन्होंने कहा कि कंटेंट से ज़्यादा प्राइसिंग फ़िल्म का नुक़सान करती है।

एनडीएफएफ के संस्थापक आशीष के सिंह ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि सिनेमा को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति के रूप में भी समझना आवश्यक है।

इस बार कार्यक्रम में “माय जर्नी” नाम से एक नया सेगमेंट शुरू किया गया, जिसमें दिल्ली के फिल्मकार अपनी रचनात्मक यात्रा साझा करते हैं। फरवरी चैप्टर में फिल्मकार इरशाद दिल्लीवाला ने अपनी यात्रा का अनुभव साझा किया। उन्होंने मेरठ में किताबों के कवर डिज़ाइनर के रूप में शुरुआत करने से लेकर फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे तक पहुँचने के अपने सफ़र के बारे में बताया। इस अवसर पर इरशाद की नई फ़िल्म “ग्रेजुएट फरज़ाना” ट्रेलर भी दिखाया गया।

दूसरी वक्ता, पुणे से फ़िल्म स्कॉलर विभा झा ने कहा कि मजबूत कहानी और भावनात्मक जुड़ाव आज भी किसी फिल्म को बड़ी सफलता दिला सकता है।

(एनडीएफएफ की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

Leave a Reply